"मूल्य" जिसमे मुख्यतः आज के हो रहे नैतिक पतन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। नैतिकता को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता ये एक रास्ता है, एक सफ़र है, एक सोच है, एक आधार है, एक नीव है, एक कदम है, समाज का आईना है हमें विकास की ऒर ले जाने का, अँधेरे में एक छोटी सी किरण है या फिर यूं कहें:
* हर माता पिता चाहते हैं उनका बच्चा बड़ा होकर अच्छा और कामयाब इंसान बने।
* कोई भी अपने बच्चों को अपराधी नहीं बनाना चाहता।
* कोई नहीं चाहता कि उनका बच्चा चोरी डकैती करे।
* कौन से माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे गालियाँ दें।
* कोई भी पेरेंट्स नहीं चाहते की उनके बच्चे बड़ो का आदर न करें।
* शायद ही कोई मम्मी पापा हो जो ये चाहते हो की उनके बच्चे बड़े होकर शराब सिगरेट और नशे में डूबें रहें।
* सभी माँ बाप अपने बच्चों को सारी सुख सुबिधायें देते हैं, अच्छे स्कूलों में भेजते है, टयूशन लगाते हैं, बच्चों को काबिल इंसान बनाने के लिए हर वो काम करते हैं जो जरूरी लगता है फिर भी कुछ छूट जाता है और बच्चे
बिगड़ जाते हैं।
* क्या कहीं कुछ छूट रहा है आज की शिक्षा में।
ये एक प्रयास है जो सिर्फ सबकी भागीदारी से सफल प्रयास हो सकता है। इसमें सबसे बड़ी भागीदारी माँ बाप की होगी क्योंकि एक बच्चा सबसे ज्यादा समय मम्मी पापा के साथ ही बिताता है। इस प्रयास को मिलजुल कर बड़ा रूप दिया जा सकता है।